चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी सियासी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में आयोजित ‘इंसाफ रैली’ के जरिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ चुनावी नैरेटिव तैयार किया।

राहुल गांधी ने पंजाब में नशे की समस्या, गैंगस्टरवाद, कानून-व्यवस्था, किसानों की परेशानियों और युवाओं के रोजगार को प्रमुख मुद्दा बनाया। कांग्रेस का आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में किए गए वादों को पूरा नहीं किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी रैली में सात प्रमुख मुद्दों के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाने का संदेश दिया। पार्टी ने यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि अगर पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनती है तो उसका संचालन दिल्ली से नहीं, बल्कि पंजाब की जनता के हितों के अनुसार होगा।
नशे के मुद्दे पर AAP सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई करने के वादे के बावजूद राज्य में यह समस्या गंभीर बनी हुई है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। रोजगार, उद्योग और आर्थिक अवसरों को बढ़ाना भी जरूरी है।
राहुल ने कहा कि पंजाब के युवाओं को बेहतर भविष्य देने के लिए ऐसी सरकार चाहिए जो उनकी समस्याओं को समझे और उनके समाधान के लिए काम करे।
सिद्धू मूसेवाला की हत्या का जिक्र, गैंगस्टरवाद पर हमला
रैली में राहुल गांधी ने दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह को मंच पर बुलाया और पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े किए।
राहुल ने आरोप लगाया कि गैंगस्टरवाद पंजाब के युवाओं और प्रतिभाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने मूसेवाला की हत्या को राज्य में बढ़ती असुरक्षा से जोड़ते हुए आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस का कहना है कि गैंगस्टरवाद और नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के बिना पंजाब के युवाओं को सुरक्षित भविष्य नहीं दिया जा सकता।
दिल्ली से चल रही सरकार का आरोप
राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर दिल्ली के नेतृत्व के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब की सरकार पंजाब के लोगों के प्रति जवाबदेह होनी चाहिए।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को राज्य की राजनीतिक स्वायत्तता से जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी का कहना है कि पंजाब के फैसले पंजाब की जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।
यह हमला सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व पर केंद्रित रहा।
कांग्रेस के सात चुनावी मुद्दे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली में पार्टी के चुनावी एजेंडे के सात प्रमुख मुद्दों को सामने रखा। पार्टी इन मुद्दों को लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है।
| क्रम | प्रमुख मुद्दा |
|---|---|
| 1 | पंजाब को नशामुक्त बनाने का संकल्प |
| 2 | गैंगस्टरवाद और अपराध पर लगाम |
| 3 | किसानों के अधिकार और आर्थिक मजबूती |
| 4 | युवाओं के लिए रोजगार के अवसर |
| 5 | दलितों और कमजोर वर्गों को मजबूत करना |
| 6 | भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई |
| 7 | पंजाब का भविष्य पंजाबियों द्वारा तय करना |
कांग्रेस का दावा है कि इन मुद्दों के जरिए वह राज्य में जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करेगी।
किसानों और युवाओं पर भी कांग्रेस का फोकस
राहुल गांधी ने पंजाब के किसानों को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उनकी आर्थिक मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि के साथ-साथ उद्योगों को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
कांग्रेस का मानना है कि रोजगार के नए अवसर पैदा होने से युवाओं को नशे और अपराध से दूर रखने में मदद मिल सकती है। पार्टी ने किसानों के हितों की रक्षा और उद्योगों के विस्तार को भी अपने चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया है।
रैली में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और किसानों के हितों को लेकर अपनी पार्टी का पक्ष रखा।
2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति
पंजाब में विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में संगरूर की रैली को कांग्रेस के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले में रैली करके सीधे आम आदमी पार्टी को चुनौती देने की कोशिश की। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का संदेश दिया।
हालांकि, पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद जैसे मुद्दे पहले भी चुनावी बहस का हिस्सा रहे हैं। कांग्रेस के सामने चुनौती यह होगी कि वह इन मुद्दों पर केवल राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय ठोस समाधान और विश्वसनीय कार्ययोजना भी जनता के सामने रखे।
निष्कर्ष: संगरूर की इंसाफ रैली के जरिए कांग्रेस ने पंजाब में नशा, गैंगस्टरवाद, रोजगार, किसान और भ्रष्टाचार को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में यह रणनीति कांग्रेस को कितना राजनीतिक लाभ पहुंचाती है।



