भोपाल। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को नाम वापसी की समयसीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने उनके निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही पुरी ने उच्च सदन में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का रास्ता साफ कर लिया है।
इस उपचुनाव में हरदीप सिंह पुरी के अलावा दो अन्य उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, जांच के दौरान दोनों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए। इसके बाद पुरी चुनाव मैदान में अकेले उम्मीदवार रह गए थे।
दो उम्मीदवारों के नामांकन क्यों हुए रद्द?
मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो उम्मीदवारों के पर्चे निरस्त किए गए थे।
| उम्मीदवार | नामांकन रद्द होने की वजह |
|---|---|
| राजकुमार लोहानी | निर्धारित समय तक अनिवार्य फॉर्म-26 का शपथपत्र जमा नहीं किया |
| कांते सयन्ना | नामांकन के लिए जरूरी प्रस्तावकों के हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेजों में कमी |
निर्वाचन अधिकारी उमेश कुमार शर्मा के मुताबिक, नामांकन पत्रों में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण दोनों उम्मीदवारों के पर्चे खारिज किए गए।
हरदीप पुरी के नामांकन पर कांग्रेस ने जताई थी आपत्ति
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन को लेकर कांग्रेस नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी सवाल उठाए थे। कांग्रेस नेता हेमंत कटारे और अन्य आपत्तिकर्ताओं का दावा था कि पुरी के फॉर्म-26 में दाखिल हलफनामे में कुछ कमियां हैं।
निर्वाचन अधिकारी ने इन आपत्तियों की जांच की और पुरी के नामांकन को वैध घोषित किया। आदेश में कहा गया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं पाया गया।
इसके बाद कांग्रेस नेताओं हेमंत कटारे और आतिफ अकील ने इस आदेश के खिलाफ अदालत जाने की बात कही थी।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट
मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 14 अक्टूबर 2026 को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था।
उनका कार्यकाल मूल रूप से 2 अप्रैल 2030 तक था। इसी रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया गया। भाजपा ने इस सीट से हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया था।
राजनयिक से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
हरदीप सिंह पुरी भारतीय विदेश सेवा के 1974 बैच के अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अपने राजनयिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
-
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे।
-
ब्रिटेन और ब्राजील में भारत के राजदूत के रूप में काम किया।
-
2014 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
-
2019 में केंद्रीय राज्य मंत्री बने।
-
जुलाई 2021 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।
- 2024 में भी उन्हें इसी मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम
हरदीप सिंह पुरी के निर्विरोध निर्वाचन को मध्य प्रदेश में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। राज्य विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में उपचुनाव में मतदान की नौबत नहीं आई।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से निर्वाचन अधिकारी के फैसले को चुनौती देने की बात सामने आने के बाद इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी रहने की संभावना है।
निष्कर्ष: हरदीप सिंह पुरी का मध्य प्रदेश से राज्यसभा में निर्विरोध पहुंचना भाजपा के लिए अहम उपलब्धि है। वहीं, नामांकन प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों और संभावित कानूनी चुनौती पर भी आगे नजर बनी रहेगी।



