यूपी में डिजिटल न्याय व्यवस्था की तैयारी: पुलिस से अदालत तक एक क्लिक पर मिलेगी केस की जानकारी, थाने और जेल होंगे ऑनलाइन कनेक्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुलिस जांच से लेकर अदालत में सुनवाई और जेल प्रबंधन तक की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के पुलिस थानों, फॉरेंसिक लैब, अभियोजन विभाग, जेलों और अदालतों को एक साझा डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। इस व्यवस्था के लागू होने से किसी भी मामले से जुड़ी जरूरी जानकारी अलग-अलग विभागों से जुटाने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
एक प्लेटफॉर्म पर आएगी केस से जुड़ी जानकारी
इस पूरी व्यवस्था का अहम हिस्सा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS 2.0) है। इसका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली के अलग-अलग विभागों के बीच सूचनाओं का डिजिटल आदान-प्रदान आसान बनाना है।
इसके जरिए एफआईआर, केस डायरी, चार्जशीट, अदालत के आदेश, फॉरेंसिक रिपोर्ट और जेल से संबंधित रिकॉर्ड को जरूरत के अनुसार साझा किया जा सकेगा। इससे पुलिस, अभियोजन और न्यायालय के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
ई-फॉरेंसिक 2.0 में अब तक 6,334 मामले दर्ज
प्रदेश में फॉरेंसिक जांच को भी डिजिटल बनाने पर काम चल रहा है। जुलाई 2026 से शुरू हुई ई-फॉरेंसिक 2.0 व्यवस्था में अब तक 6,334 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से 535 मामलों की रिपोर्ट तैयार हो चुकी है।
इस सिस्टम के जरिए केस का पंजीकरण, जांच के लिए आवंटन और रिपोर्ट भेजने जैसे काम ऑनलाइन किए जा रहे हैं। इससे फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और रिपोर्ट की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
1,982 थानों और 18 फॉरेंसिक लैब में बेहतर होगी कनेक्टिविटी
डिजिटल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए प्रदेश के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में कनेक्टिविटी बेहतर करने की योजना है। पुलिस विभाग को कंप्यूटर, टैबलेट, प्रिंटर, वेबकैम और क्यूआर कोड रीडर जैसे तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
जेलों में भी कंप्यूटर, स्कैनर और बायोमीट्रिक मशीनों जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आसान होगी पेशी
जेलों और अदालतों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा को भी मजबूत किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए 535 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट की आपूर्ति और स्थापना की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इससे कैदियों की पेशी और संबंधित न्यायिक कार्यवाही में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ सकेगा।
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में यूपी का प्रदर्शन
नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन से जुड़े 12 सितंबर 2026 के एनसीएल डैशबोर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश को 85.99 अंक मिले हैं। 25 जून 2026 को प्रदेश का स्कोर 78.13 था। यानी इस अवधि में 7.86 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। ई-साक्ष्य और ई-समन जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के इस्तेमाल को भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि केस से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान में देरी कम हो। पुलिस को जांच के दौरान फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य विभागीय रिकॉर्ड समय पर मिल सकेंगे। अभियोजन पक्ष को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने में सुविधा होगी और अदालतों तक सूचनाएं पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी विभागों में नेटवर्क, उपकरण, डेटा की शुद्धता और कर्मचारियों का प्रशिक्षण कितना प्रभावी रहता है। साथ ही संवेदनशील केस रिकॉर्ड की सुरक्षा और अधिकृत लोगों तक ही उसकी पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में डिजिटल न्याय व्यवस्था का विस्तार पुलिस जांच से लेकर अदालत और जेल तक कामकाज को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो मामलों की निगरानी, सूचनाओं के आदान-प्रदान और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।



