धनतेरस पर सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: ऑल-टाइम हाई से 22% सस्ता हुआ गोल्ड, जानें गहने, ETF या SGB—कहां निवेश करना बेहतर?

नई दिल्ली। धनतेरस और दिवाली के त्योहार से पहले सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद घरेलू बाजार में सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 22 फीसदी नीचे आ गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह सोना खरीदने का सही मौका है और धनतेरस पर गहने खरीदना बेहतर होगा या गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करना फायदेमंद रहेगा?
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 24 कैरेट सोने का भाव 29 जनवरी 2026 को 10 ग्राम के लिए ₹1,76,306 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। 2 नवंबर को MCX स्पॉट गोल्ड करीब ₹1,37,330 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यानी रिकॉर्ड स्तर से करीब ₹38,976 की गिरावट दर्ज हुई।
सोने की कीमतों में गिरावट की वजह क्या है?
सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। हाल के महीनों में अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, ऊंची बॉन्ड यील्ड और महंगे कच्चे तेल ने सोने पर दबाव बनाया है।
इसके अलावा, डॉलर की मजबूती भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती है। हालांकि केंद्रीय बैंकों और गोल्ड ETF में निवेश की मांग सोने को कुछ समर्थन दे सकती है। इसलिए कीमतों में गिरावट के बावजूद आगे का रुख निश्चित नहीं माना जा सकता।
धनतेरस पर गहने खरीदें या निवेश के लिए सोना लें?
धनतेरस पर सोना खरीदने की परंपरा है, लेकिन खरीदारी से पहले यह समझना जरूरी है कि आभूषण और निवेश वाला सोना एक जैसे नहीं होते।
1. सोने के आभूषण: जरूरत और परंपरा के लिए
अगर धनतेरस पर गहने खरीदने का उद्देश्य पहनना या परिवार के लिए आभूषण लेना है, तो फिजिकल गोल्ड बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज, वेस्टेज, GST और बेचते समय मिलने वाली कीमत को जरूर समझें। BIS हॉलमार्क और HUID की जांच करना भी जरूरी है।
2. गोल्ड ETF: निवेश के लिए सुविधाजनक विकल्प
जो लोग केवल सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से निवेश के जरिए फायदा लेना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ETF एक विकल्प हो सकता है। इसमें घर पर सोना रखने, लॉकर और मेकिंग चार्ज की जरूरत नहीं होती। हालांकि ETF में निवेश के लिए डीमैट और ट्रेडिंग खाते की जरूरत पड़ सकती है। इसमें बाजार जोखिम और फंड से जुड़े खर्च भी होते हैं।
3. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: पुराने निवेशकों के लिए अहम विकल्प
SGB में निवेश करने वालों को सोने की कीमत से जुड़ा रिटर्न और निर्धारित शर्तों के अनुसार 2.5 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है। पहले जारी किए गए बॉन्ड सेकेंडरी मार्केट में उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन उनकी कीमत, शेष अवधि, ब्याज भुगतान और लिक्विडिटी देखकर ही फैसला करना चाहिए। टैक्स लाभ भी बॉन्ड की खरीद और रिडेम्पशन की शर्तों तथा लागू नियमों पर निर्भर करता है।
एक साथ पैसा लगाने के बजाय चरणों में खरीदारी क्यों?
विशेषज्ञों की सलाह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशक जल्दबाजी में पूरा पैसा एक साथ लगाने से बचें। निवेश को कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग समय पर खरीदारी करने से किसी एक दिन की कीमत पर निर्भरता कम हो सकती है।
हालांकि, यह तरीका भी मुनाफे की गारंटी नहीं देता। निवेश से पहले अपने लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।
धनतेरस पर खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
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आभूषण खरीदते समय BIS हॉलमार्क और HUID जरूर जांचें।
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सोने की शुद्धता, वजन और मेकिंग चार्ज की जानकारी लें।
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केवल निवेश के उद्देश्य से खरीद रहे हैं तो ETF और अन्य विकल्पों की लागत की तुलना करें।
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SGB खरीदने से पहले उसकी मैच्योरिटी, ब्याज और टैक्स नियम समझें।
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बाजार में गिरावट देखकर जल्दबाजी में बड़ा निवेश न करें।
निष्कर्ष: सस्ता सोना खरीदने का मौका, लेकिन फैसला सोच-समझकर
ऑल-टाइम हाई से सोने की कीमतों में आई करीब 22 फीसदी गिरावट ने धनतेरस पर खरीदारों को एक नया अवसर दिया है। लेकिन कम कीमत का मतलब यह नहीं कि सोना आगे भी जरूर बढ़ेगा। अगर उद्देश्य आभूषण खरीदना है तो हॉलमार्क और कुल लागत पर ध्यान दें, जबकि निवेश के लिए गोल्ड ETF और उपलब्ध SGB जैसे विकल्पों की तुलना करें। सही विकल्प आपकी जरूरत, समयावधि और जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगा।



