MLC Election Results 2026: विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर तंज कसे जाने के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरों को नसीहत देने से पहले उन्हें अपनी पार्टी के प्रदर्शन का आत्मविश्लेषण करना चाहिए। उन्होंने वाराणसी और नागपुर में भाजपा की हार का मुद्दा उठाते हुए महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश में सुस्ती को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए।

जयराम रमेश ने ‘प्रवचनमंत्री’ कहकर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी का जवाब दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को आत्मविश्लेषण की जरूरत है, लेकिन वह दूसरों को प्रवचन दे रहे हैं।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि कांग्रेस की सीटों की संख्या पर टिप्पणी करने से पहले प्रधानमंत्री को यह भी सोचना चाहिए कि उनके अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों विधान परिषद सीटों पर भाजपा को हार का सामना क्यों करना पड़ा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गढ़ माने जाने वाले नागपुर में कांग्रेस की जीत का भी जिक्र किया।
कांग्रेस नेता का कहना है कि चुनावी नतीजों को केवल किसी एक पार्टी की जीत या हार के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इनके पीछे के राजनीतिक संदेश पर भी विचार करना जरूरी है।
वाराणसी और नागपुर में भाजपा को झटका
हालिया विधान परिषद चुनाव में वाराणसी की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर भाजपा को हार मिली। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए यहां के नतीजों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी समर्थित लाल बिहारी यादव ने भाजपा प्रत्याशी प्रमोद मिश्रा को हराया। वहीं, वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा के मौजूदा एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को पराजित किया।
उधर, महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। नागपुर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र भी है। इस वजह से यहां भाजपा की हार को पार्टी के लिए अहम राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
महंगाई और बेरोजगारी पर भी सरकार को घेरा
जयराम रमेश ने अपने बयान में महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों परिवार महंगाई से परेशान हैं, युवा रोजगार की समस्या से जूझ रहे हैं और निजी निवेश की स्थिति भी चिंता का विषय है।
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से राजनीतिक तंज और बयानबाजी से आगे बढ़कर इन मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि वाराणसी, नागपुर, लखनऊ, प्रयागराज और पटना के चुनावी नतीजे सरकार की नीतियों को लेकर जनता के असंतोष का संकेत हैं। हालांकि, यह कांग्रेस की राजनीतिक व्याख्या है, न कि सभी मतदाताओं की राय का स्वतः प्रमाण।
पीएम मोदी ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर क्या कहा था?
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अक्टूबर को विधान परिषद चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान होने का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के प्रदर्शन पर तंज कसा था। उन्होंने एक्स पर पूछा था कि चार राज्यों में 28 सीटों के चुनाव में कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं।
प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को कांग्रेस की ओर से ईवीएम पर उठाए जाने वाले सवालों के जवाब के रूप में देखा गया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि भाजपा को बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर इतना भरोसा है, तो लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी इसी व्यवस्था से कराने की प्रतिबद्धता जतानी चाहिए।
यूपी की राजनीति में क्यों अहम हैं ये नतीजे?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद के नतीजों ने राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति पर विचार करने का अवसर दिया है। वाराणसी जैसी महत्वपूर्ण सीट पर भाजपा की हार और अन्य क्षेत्रों में मुकाबले ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका दिया है।
हालांकि, विधान परिषद चुनावों के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनावों का संकेत मानना उचित नहीं होगा। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सीमित और अलग होता है। इसके बावजूद इन चुनावों से स्थानीय राजनीतिक समीकरण, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और दलों के संगठनात्मक प्रदर्शन के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
फिलहाल, एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों दल इन नतीजों से क्या सबक लेते हैं और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति किस तरह तैयार करते हैं।



