प्रयागराज/लखनऊ | समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की जमानत याचिकाएं मंजूर करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी है। हालांकि, अदालत ने दोनों की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। यानी इस आदेश से उनकी सजा पर फिलहाल राहत मिली है, लेकिन निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने का फैसला बरकरार है।

जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने सुनाया फैसला
दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं के जरिए ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट के फैसलों को चुनौती दी गई थी। दोनों ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत देने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने मामले में सुनवाई के बाद जमानत और सजा निलंबन की राहत दी। अदालत ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया।
क्या है दो पैन कार्ड मामला?
यह मामला वर्ष 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड थे और इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। मामले में आजम खान पर भी आरोप लगाए गए थे। ये आरोप न्यायिक कार्यवाही का विषय रहे हैं।
निचली अदालत ने सुनाई थी सजा
नवंबर 2025 में रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद अपीलीय अदालत ने आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 वर्ष और जुर्माना पांच लाख रुपये कर दिया था। अब्दुल्ला आजम की सात वर्ष की सजा बरकरार रखते हुए जुर्माना बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये किया गया था।
क्या अब जेल से बाहर आएंगे आजम खान?
हाईकोर्ट से मिली जमानत इस मामले में राहत है, लेकिन इससे तत्काल रिहाई अपने आप सुनिश्चित नहीं होती। यदि किसी अन्य मामले में हिरासत या सजा प्रभावी है, तो रिहाई के लिए उससे जुड़ी कानूनी स्थिति भी देखनी होगी। दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने के कारण इस आदेश को मामले में बरी होना नहीं माना जा सकता।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में राहत मिली है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और अन्य मामलों की स्थिति पर दोनों की रिहाई निर्भर कर सकती है।



