नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-2 स्थित एक निजी स्कूल में नौ साल की बच्ची की अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा बुधवार सुबह खेलकूद की कक्षा से लौटने के बाद अपने क्लासरूम में अचानक गिर पड़ी। घटना स्कूल के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
बच्ची के परिवार के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि वर्षों की उम्मीदों के टूटने जैसा है। परिवार को करीब आठ साल तक संतान का इंतजार था। मन्नतों के बाद बेटी का जन्म हुआ तो मां ने उसकी परवरिश के लिए अपने शिक्षक बनने के सपने और कॅरिअर को पीछे छोड़ दिया था। अब बेटी की मौत के बाद परिवार स्कूल की चिकित्सा व्यवस्था और समय पर इलाज को लेकर सवाल उठा रहा है।

CCTV में कैद हुआ बच्ची के अचानक गिरने का घटनाक्रम
दिल्ली के लवली हेरिटेज स्कूल में हुई इस घटना के सीसीटीवी फुटेज में बच्ची खेलकूद की कक्षा से लौटकर क्लासरूम में आती दिखाई देती है। कुछ ही देर बाद वह अपनी कमर पर हाथ रखती है और अचानक मुंह के बल जमीन पर गिर जाती है।
कक्षा में मौजूद शिक्षक तुरंत बच्ची के पास पहुंचते हैं। उसे उठाकर बेंच पर बैठाने की कोशिश की जाती है। इसके बाद शिक्षक मदद के लिए बाहर जाते हैं और बच्ची को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है।
पुलिस ने स्कूल के सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
आठ साल के इंतजार के बाद मिली थी बेटी
बच्ची के परिवार की कहानी बेहद भावुक कर देने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, माता-पिता को करीब आठ साल तक संतान का इंतजार करना पड़ा था। बेटी के जन्म के बाद परिवार की खुशियां लौट आई थीं।
बच्ची की मां ने शादी के बाद बीएड की पढ़ाई की थी और वह शिक्षिका बनना चाहती थीं। लेकिन बेटी के जन्म के बाद उन्होंने उसकी देखभाल और परवरिश को प्राथमिकता देते हुए अपना कॅरिअर छोड़ दिया।
पिता मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस चलाते हैं और शाम को जिम में ट्रेनिंग भी देते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं होने के बावजूद वह बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे।
बच्ची को बैडमिंटन खेलना पसंद था। वह अक्सर अपने पिता और चाचा के साथ खेलती थी। परिवार के लिए उसकी अचानक मौत किसी गहरे सदमे से कम नहीं है।
परिवार ने स्कूल की चिकित्सा व्यवस्था पर उठाए सवाल
बच्ची के परिजनों ने स्कूल प्रशासन की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि बच्ची के अचानक गिरने के बाद उसे समय पर जरूरी मेडिकल सहायता नहीं मिल सकी।
परिजनों ने यह भी सवाल किया कि बच्ची को तत्काल सीपीआर (CPR) क्यों नहीं दिया गया। उनका कहना है कि स्कूल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं और प्रशिक्षित कर्मचारी होने चाहिए थे।
परिवार ने बच्ची को अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र जांच और पुष्टि अभी बाकी है।
अस्पताल में मृत घोषित, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस के अनुसार, स्कूल के कर्मचारी बच्ची को पहले पांडव नगर स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां से उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई। इसके बाद बच्ची को निर्माण विहार स्थित दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस को सुबह करीब 9:52 बजे पीसीआर कॉल मिली थी। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।
प्रारंभिक जानकारी में मौत की वजह संभावित कार्डियक अरेस्ट बताई जा रही है। हालांकि, मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस ने स्कूल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया है।
स्कूलों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में अचानक कार्डियक इमरजेंसी दुर्लभ हो सकती है, लेकिन ऐसी स्थिति में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। स्कूलों में प्रशिक्षित स्टाफ, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और आपातकालीन अस्पताल तक पहुंचाने की स्पष्ट प्रक्रिया होना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही बच्ची की मौत के कारणों तथा स्कूल की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



