डिजिटल डेस्क, बर्लिन। जर्मनी में युवाओं के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरी Gen Z की आवाज के बीच हिंसा भड़कने से राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। 31 अक्टूबर 2026 को देश के 30 से ज्यादा शहरों में युवाओं ने प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों में बेहतर शिक्षा, महंगे होते जीवनयापन, किफायती आवास, पर्यावरण और संभावित अनिवार्य सैन्य सेवा जैसे मुद्दे उठाए गए। शुरुआत में प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन बाद में फ्रैंकफर्ट, कोलोन, हैम्बर्ग और बर्लिन समेत कई शहरों में तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं सामने आईं।

फ्रैंकफर्ट में सबसे ज्यादा बिगड़े हालात
फ्रैंकफर्ट में प्रदर्शन के बाद नकाबपोश उपद्रवियों ने दुकानों के शीशे तोड़े और कई दुकानों में लूटपाट की। पुलिस और आपातकालीन सेवाओं पर पत्थर, बोतलें और पेट्रोल बम फेंके जाने की भी खबरें आईं। पुलिस ने हालात काबू करने के लिए बड़ी संख्या में जवान तैनात किए और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रैंकफर्ट में 17 दुकानों को नुकसान पहुंचा और पांच दुकानों में लूटपाट हुई। हेस्से के गृह मंत्री रोमन पोसेक ने बताया कि 54 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों की उम्र 13 से 29 वर्ष के बीच बताई गई है।
गृह मंत्री ने प्रवासी समुदायों पर लगाए आरोप
जर्मनी के संघीय गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट ने अखबार बिल्ड से बातचीत में हिंसा के लिए हिंसक वामपंथी समूहों और प्रवासी समुदायों के उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुछ समूहों ने अपने कब्जे में लेकर हिंसा और लूटपाट की। मंत्री ने आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और कड़ी सजा देने की बात कही।
हालांकि, इस बयान पर जर्मनी की राजनीति में मतभेद भी सामने आए हैं। रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि बिना पूरी जानकारी के अपराधियों की पहचान को प्रवासी पृष्ठभूमि से जोड़ना सही दिशा नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि हिंसा करने वाले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की मांगों से अलग है हिंसा का मामला
प्रदर्शन आयोजित करने वाले समूह Gen Z regelt! ने हिंसा से दूरी बनाते हुए कहा कि प्रदर्शन समाप्त होने के बाद हुई घटनाओं पर उनका नियंत्रण नहीं था। संगठन का कहना है कि युवा अपने भविष्य से जुड़े फैसलों में अपनी बात सुने जाने की मांग कर रहे हैं। समूह ने 14 नवंबर को फिर से प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।
जर्मनी में इस घटनाक्रम के बाद दो अहम सवाल चर्चा में हैं—एक तरफ युवाओं की शिक्षा, रोजगार और महंगाई से जुड़ी चिंताएं हैं, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग। फिलहाल पुलिस हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए वीडियो और अन्य सबूतों की जांच कर रही है।



