प्रयागराज | प्रयागराज के नवाबगंज क्षेत्र में जमीन के नीचे दबे तीन ड्रमों से करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। राजेश यादव और उसके परिवार की अचानक बढ़ी संपत्ति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस और आयकर विभाग अब रकम के स्रोत के साथ जमीन और संपत्तियों की खरीद का भी ब्योरा जुटा रहे हैं। हालांकि, बरामद नकदी का वास्तविक मालिक कौन है और पैसा कहां से आया, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

पुणे से गांव लौटने के बाद बदली आर्थिक स्थिति
स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजेश यादव और उसके परिवार के सदस्य कोरोना महामारी के दौरान पुणे से अपने गांव लौटे थे। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव देखने को मिला। ग्रामीणों का दावा है कि परिवार ने आसपास के गांवों में जमीनें खरीदीं और ट्रैक्टर, पिकअप वाहन समेत कई संपत्तियां हासिल कीं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परिवार की ओर से चार गांवों में प्लॉट खरीदने की जानकारी सामने आई है। जमीनों की संख्या और खरीद की वास्तविक कीमत का पता लगाने के लिए संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
जमीन के नीचे मिले तीन ड्रमों ने बढ़ाई जांच
नवाबगंज के बरईपुर रामनगर गांव में पुलिस को सूचना मिली थी कि जमीन के भीतर बड़ी मात्रा में नकदी छिपाई गई है। इसके बाद पुलिस टीम ने तलाशी अभियान चलाया। खुदाई के दौरान तीन ड्रम बरामद हुए, जिनमें 500 रुपये के नोटों की गड्डियां रखी थीं।
बरामद नकदी की गिनती के लिए आयकर विभाग की टीम और मशीनें लगाई गईं। अधिकारियों के अनुसार, पूरी रकम की आधिकारिक जानकारी गिनती पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
आयकर विभाग खंगाल रहा पैसों का हिसाब
मामले में पुलिस और आयकर विभाग की संयुक्त जांच चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकदी कहां से आई, जमीनों की खरीद में किस धन का इस्तेमाल हुआ और संपत्तियों का वास्तविक मालिक कौन है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच की एक कड़ी पुणे से भी जुड़ रही है, जहां परिवार के सदस्य पहले काम करते थे। अधिकारियों की टीम वहां के संभावित वित्तीय संबंधों की पड़ताल कर रही है।
कई सवाल, जवाब का इंतजार
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कम समय में इतनी संपत्ति कैसे जुटाई गई और जमीन के नीचे नकदी छिपाने की वजह क्या थी। फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच एजेंसियों के पास तलाशे जा रहे हैं।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक नकदी के स्रोत या किसी अपराध में उसकी संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ होगी।



