यूपी में वोटर लिस्ट पर बड़ा अभियान 12 नवंबर से शुरू, 2027 चुनाव से पहले हर वोट की होगी जांच; 13.39 करोड़ मतदाताओं के नाम पर खास नजर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर निर्वाचन आयोग ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में 12 नवंबर से मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (Special Summary Revision-2027) का अभियान शुरू होने जा रहा है। इस अभियान के तहत पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने, छूटे हुए मतदाताओं की पहचान करने और सूची में मौजूद गलतियों को दुरुस्त करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार युवाओं और महिलाओं को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय स्तर के कर्मचारियों की भी मदद ली जाएगी।
यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनी हुई है। निर्वाचन आयोग का प्रयास है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और मतदाता सूची में अपात्र या दोहरी प्रविष्टियों की समस्या को दूर किया जा सके।
13.39 करोड़ मतदाताओं की सूची, महिलाओं और युवाओं पर विशेष फोकस
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधानसभा क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूची में 13.39 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए थे। इससे पहले 27 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित सूची में 15.44 करोड़ मतदाता थे। इस प्रकार नई सूची में मतदाताओं की संख्या में 13.24 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक, नई मतदाता सूची में करीब 7.30 करोड़ पुरुष, 6.09 करोड़ महिलाएं और 4,206 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। आयोग के सामने महिला मतदाताओं का अनुपात बढ़ाना भी एक बड़ी चुनौती है। अंतिम सूची में प्रति 1,000 पुरुष मतदाताओं पर महिलाओं की संख्या घटकर 834 रह गई है, जबकि वर्ष 2025 की सूची में यह आंकड़ा 877 था।
इसी अंतर को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सहायता से घर-घर जाकर ऐसी पात्र महिलाओं की पहचान की जाएगी, जिनका नाम अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
युवाओं को जोड़ने के लिए कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों की मदद
इस बार निर्वाचन आयोग का विशेष ध्यान पहली बार मतदान करने वाले युवाओं पर भी रहेगा। कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में संचालित इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब को सक्रिय किया जाएगा। इनके माध्यम से 18 से 19 वर्ष की आयु के पात्र युवाओं को मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए जागरूक किया जाएगा।
इसके अलावा राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC), नेहरू युवा केंद्र, युवक मंगल दल और भारत स्काउट्स एंड गाइड्स जैसे संगठनों की मदद भी ली जाएगी। आयोग चाहता है कि पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को समय रहते मतदाता सूची में जगह मिले और वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
राशन कार्ड लाभार्थियों की सूची से भी होगी पहचान
निर्वाचन अधिकारियों को खाद्य एवं रसद विभाग की राशन दुकानों पर उपलब्ध लाभार्थियों की सूची की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के ऐसे पात्र लोगों की पहचान की जाएगी, जिनका नाम विधानसभा मतदाता सूची में नहीं है।
ऐसे लोगों को फॉर्म-6 भरकर मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही शहरी और पंचायत स्थानीय निकायों की मतदाता सूचियों का विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची से मिलान भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं की पहचान करना और पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
फॉर्म-6 भरते समय रखें सावधानी, डुप्लीकेट आवेदन पर भी आयोग की नजर
मतदाता पंजीकरण के दौरान एक और महत्वपूर्ण समस्या सामने आई है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने फॉर्म-6 के माध्यम से बार-बार आवेदन किए जाने के मामलों पर चिंता जताई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मोबाइल पर पुष्टि संदेश या रेफरेंस नंबर नहीं मिल रहा था। इसके कारण कुछ लोग दोबारा आवेदन कर रहे थे और सिस्टम में एक ही व्यक्ति के कई आवेदन दर्ज होने की स्थिति बन रही थी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालकों को सही प्रक्रिया का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। आवेदन पूरा होने के लिए ई-साइन प्रमाणीकरण जरूरी है। आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त OTP दर्ज करने के बाद रेफरेंस नंबर जनरेट होता है।
आयोग ने CSC संचालकों को आवेदकों का वास्तविक और सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज करने तथा रेफरेंस नंबर सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं। आवेदकों को सलाह दी गई है कि पुष्टि संदेश में देरी होने पर तुरंत दूसरा आवेदन न करें, बल्कि पहले अपने आवेदन की स्थिति जांचें।
कब से कब तक चलेगा अभियान? जानिए पूरा कार्यक्रम
| महत्वपूर्ण प्रक्रिया | निर्धारित तारीख |
|---|---|
| मतदाता सूची का प्रकाशन | 12 नवंबर 2026 |
| दावे और आपत्तियां | 12 नवंबर से 11 दिसंबर |
| दावे-आपत्तियों का निस्तारण | 28 दिसंबर तक |
| अंतिम मतदाता सूची | 4 जनवरी 2027 |
2027 चुनाव से पहले क्यों अहम है यह अभियान?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची हमेशा से महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की यह कवायद चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिहाज से अहम है।
एक तरफ आयोग का लक्ष्य पात्र नागरिकों को मताधिकार दिलाना है, वहीं दूसरी तरफ गलत, दोहरी और अपात्र प्रविष्टियों की समस्या को दूर करना भी जरूरी है। महिला मतदाताओं और पहली बार वोट डालने वाले युवाओं की संख्या बढ़ाने पर जोर इस अभियान को और महत्वपूर्ण बनाता है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पात्र मतदाताओं का नाम सूची में सही तरीके से जुड़ता है या नहीं और किसी योग्य नागरिक का नाम अनजाने में छूट तो नहीं जाता।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 12 नवंबर से शुरू होने वाला यह अभियान उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को कितना अधिक पारदर्शी और समावेशी बना पाता है।



