यूपी में सपा की बड़ी जॉइनिंग: BJP-BSP छोड़ कई नेताओं ने थामा अखिलेश यादव का हाथ, 2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच नेताओं के आने-जाने का सिलसिला तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) में भाजपा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अन्य दलों के कई नेताओं के शामिल होने से प्रदेश की सियासत में नई हलचल देखने को मिल रही है। सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मौजूदगी में अलग-अलग कार्यक्रमों में नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
राजपाल सैनी समेत कई नेताओं ने ज्वाइन की सपा
16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में पूर्व राज्यसभा सांसद राजपाल सैनी भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। उनके साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई अन्य नेताओं ने भी सपा का दामन थामा।
सपा में शामिल होने वालों में भाजपा नेता एवं प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य हरवीर मलिक, बसपा से जुड़े रहे नेता शाने अली और नंद किशोर पुंडीर सहित विभिन्न दलों के कई नेता शामिल बताए गए हैं। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), निषाद पार्टी और आजाद समाज पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण की।
राजपाल सैनी का राजनीतिक सफर बसपा से शुरू हुआ था। वह वर्ष 2010 से 2016 तक बसपा के राज्यसभा सांसद रहे और मायावती सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। बाद में वह भाजपा में शामिल हुए थे। अब उनका सपा में आना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से चर्चा का विषय बना हुआ है।
इससे पहले भी सपा में शामिल हुए थे भाजपा-बसपा के नेता
15 अक्टूबर को भी समाजवादी पार्टी में कई नेताओं ने सदस्यता ग्रहण की थी। इनमें भाजपा के पूर्व विधायक राजीव चन्ना, बसपा के पूर्व विधायक विनय कुरानी और चंद्रपाल सिंह सहित कई अन्य नेताओं के नाम सामने आए। पूर्व अधिकारियों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने भी सपा की सदस्यता ली।
इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और दल अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नए सदस्यों का स्वागत करते हुए पार्टी के विस्तार पर जोर दिया। 16 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि यह अभी शुरुआत है और दूसरे दलों के कई विधायक भी संपर्क में हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी में शामिल होने के इच्छुक नेताओं के बारे में विचार किया जाएगा।
सपा की ओर से नए सदस्यों के जुड़ने को पार्टी के संगठनात्मक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन नेताओं के शामिल होने का आगामी विधानसभा चुनाव के परिणामों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ेगी सियासी सरगर्मी?
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा, सपा और बसपा समेत सभी प्रमुख दल अपने संगठन और राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में दूसरे दलों के नेताओं का सपा में शामिल होना राजनीतिक चर्चा को तेज कर सकता है।
हालांकि, केवल नेताओं के पार्टी बदलने से चुनावी तस्वीर तय नहीं होती। नए सदस्यों की क्षेत्रीय पकड़, संगठनात्मक सक्रियता और मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल, सपा में लगातार हो रही जॉइनिंग ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब देखना होगा कि पार्टी में शामिल हुए नेता आगामी चुनाव की तैयारियों में किस तरह भूमिका निभाते हैं।





