हेल्थ अलर्ट: सेहत के लिए कितने सुरक्षित हैं ग्रीन पटाखे? बाजार से लाने से पहले जान लीजिए जरूरी बातें
Green Crackers: ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाने वाले माने जाते हैं। इनमें बारीक प्रदूषण कणों का उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य होता है। हालांकि, ये पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं हैं। इनसे निकलने वाला धुआं भी फेफड़ों और दिल को प्रभावित कर सकता है।
दिवाली रोशनी, हंसी और उल्लास का पर्व है। लोग इसमें दिए जलाते हैं, एक दूसरे को उपहार देते हैं और खुशी जाहिर करने के लिए पटाखे फोड़ते हैं। हालांकि पटाखे जलाने को लेकर अक्सर विवाद रहता है। असल में इनसे निकलने वाला धुआं और जहरीली गैसें हवा को प्रदूषित करने के साथ हमारी सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञ सभी लोगों को प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे न जलाने की सलाह दे रहे हैं।
ग्रीन पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 7 और 8 नवंबर, 2026 को ग्रीन पटाखे फोड़ने की अनुमति दी है। नियम के अनुसार पटाखे सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक फोड़े जा सकेंगे। यहअनुमति सुप्रीम कोर्ट के 15 अक्तूबर, 2025 के पहले के आदेश के अनुसार दी गई है।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वैध प्रमाणपत्र रखने वाले पटाखा और आतिशबाजी निर्माता केवल ग्रीन पटाखों का ही निर्माण कर सकेंगे।
- बेरियम वाले पटाखों और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनईईआरआई) से ग्रीन पटाखों के रूप में मंजूरी नहीं पाने वाले पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी।
पटाखों में रंग और आवाज पैदा करने के लिए कई तरह के रसायनों और धातुओं का इस्तेमाल होता है। इनके जलने से जहरीली गैसों के अवशेष भी निकलते हैं। इनसे हवा की गुणवत्ता तो खराब होती ही है साथ ही सेहत को भी गंभीर खतरे हो सकते हैं।
क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?
ग्रीन पटाखे सीएसआईआर-एनईईआरआई द्वारा विकसित किए गए कम उत्सर्जन वाले पटाखे हैं। इन्हें पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है। ये आम पटाखों की तुलना में धुआं, शोर और प्रदूषण कम फैलाते हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाले रसायनों और कच्चे माल की मात्रा या संरचना में बदलाव किया जाता है, ताकि जलने पर कम प्रदूषण निकले।
- माना जाता है कि ये सामान्य पटाखों के मुकाबले पीएम 2.5 और पीएम 10, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन 30 से 40% तक कम करते हैं।
- यानी ग्रीन पटाखे प्रदूषण कम कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इनसे धुआं बिल्कुल नहीं निकलेगा।
क्या ग्रीन पटाखे सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ग्रीन पटाखे, पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण कम फैलाते हैं पर इसका मतलब ये नहीं है कि ये पटाखे पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
- ग्रीन पटाखे भी जलने पर धुआं, गैसें और बारीक कण छोड़ते हैं। ये कण सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं।
- इससे भी खांसी, गले में जलन, सांस फूलना और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
- इसके अलावा पटाखों की तेज आवाज से सुनने की क्षमता, नींद और मानसिक सुकून प्रभावित हो सकता है।
- बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल या सांस के मरीजों को इनसे विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
मसलन आम पटाखों की तुलना में इनसे खतरा कम होता है पर इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। पैकेट पर सिर्फ ग्रीन या इको-फ्रेंडली लिखा होना इसकी प्रमाणिकता का सबूत नहीं है। पैकेट पर निर्माता की जानकारी, जरूरी लाइसेंस और क्यूआर कोड देखना भी जरूरी है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।



