लखनऊ| किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े कथित मतांतरण और महिला उत्पीड़न मामले में आरोपी डॉ. रमीज एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस पूछताछ और पीड़िता के बयानों से उसके कथित तौर-तरीकों को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। इनमें सबसे विचित्र दावा मुर्गे के खून से प्रेम पत्र लिखने का है। बताया गया है कि आरोपी इन पत्रों को अपना खून बताकर युवतियों को प्रभावित करने की कोशिश करता था। हालांकि, मामले के सभी आरोपों की जांच और न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

मुर्गे के खून से लिखता था प्रेम पत्र
जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. रमीज युवतियों को आकर्षित करने के लिए सामान्य प्रेम पत्रों से अलग तरीका अपनाता था। आरोप है कि वह मुर्गे के खून से पत्र लिखता और फिर युवतियों को बताता था कि यह उसका अपना खून है। इस तरीके के जरिए वह सामने वाली युवती के मन में भावनात्मक प्रभाव पैदा करने की कोशिश करता था।
यह दावा इस मामले का सबसे असामान्य पहलू बनकर सामने आया है।
भरोसा जीतने के बाद ब्लैकमेलिंग के आरोप
पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी से उसकी मुलाकात मेडिकल की पढ़ाई के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और आरोपी ने शादी का भरोसा दिया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि इसी दौरान उसके साथ कई बार जबरदस्ती की गई। इतना ही नहीं, उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो भी बनाए गए। बाद में इन्हीं निजी सामग्रियों का इस्तेमाल उसे डराने और दबाव में रखने के लिए किए जाने का आरोप है।
पुलिस से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों की जांच में भी निजी तस्वीरों और वीडियो से संबंधित सामग्री सामने आने की बात कही गई है।
शादी के रिश्ते तुड़वाने का भी आरोप
इस मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़िता का दावा है कि जब उसके परिवार ने उसकी शादी के लिए रिश्ते तलाशने शुरू किए तो आरोपी ने कथित तौर पर संभावित रिश्तों तक उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो पहुंचाए।
इससे कई रिश्ते टूटने का आरोप लगाया गया है। पीड़िता के मुताबिक, इस तरह उसकी निजी जिंदगी और पारिवारिक भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
धर्म परिवर्तन और निकाह के दबाव का दावा
पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि उस पर धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए दबाव बनाया गया। उसने आरोपी के परिवार के कुछ सदस्यों पर भी इस प्रक्रिया में दबाव बनाने और धमकाने के आरोप लगाए हैं।
उसका दावा है कि विरोध करने पर निजी वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगी
KGMU मामले की जांच में संस्थान के दूसरे लोगों की भूमिका भी सवालों में
यह मामला केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं रहा है। 31 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, एसटीएफ ने अपनी जांच में KGMU के कुछ डॉक्टरों, प्रोफेसरों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट में शिकायतों को दबाने, महिला डॉक्टरों को प्रताड़ित करने और आरोपी का पक्ष लेने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। शासन की ओर से चिह्नित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब जांच के अगले चरण पर टिकी नजरें
डॉ. रमीज से जुड़े मामले ने मेडिकल संस्थानों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, शिकायतों के निस्तारण और संस्थागत जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अब जांच एजेंसियों के सामने आरोपों की पुष्टि करने, डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल करने और मामले से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट करने की चुनौती है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर सच्चाई सामने आए।
फिलहाल KGMU का यह मामला कई गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है और आगे की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।



