अधिवक्ता हत्याकांड में नया खुलासा: दस लाख में मिले सिर्फ 50 हजार रुपये, पूरी रकम मिलती तो फरार हो जाते आरोपी

अधिवक्ता हत्याकांड की जांच में एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपियों को कथित तौर पर 10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपये ही मिल सके। जांच में सामने आए इस आर्थिक लेन-देन ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपियों को पूरी रकम मिलने की उम्मीद थी। बताया जा रहा है कि यदि उन्हें तय रकम मिल जाती तो वे फरार होने की योजना बना सकते थे। हालांकि, रकम का पूरा भुगतान नहीं होने के कारण उनकी योजना प्रभावित हुई। इस खुलासे के बाद पुलिस हत्याकांड के पीछे की साजिश, पैसों के लेन-देन और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल में जुटी है।
| क्राइम | जालौन-कानपुर
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के कालपी में अधिवक्ता गयादीन अहिरवार हत्याकांड में पैसों के लेन-देन को लेकर नया खुलासा सामने आया है। 32 बीघा जमीन के विवाद में अधिवक्ता की हत्या की साजिश रचे जाने के मामले में 10 लाख रुपये की सुपारी तय होने की बात सामने आई थी। अब आरोपियों को मिली रकम और उनके फरार होने की योजना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस के मुताबिक, अधिवक्ता की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी मोनू यादव की तलाश जारी थी। इस बीच जांच में सामने आया कि हत्या के लिए तय की गई रकम का पूरा भुगतान नहीं हुआ था। आरोपियों को कथित तौर पर 10 लाख रुपये मिलने थे, लेकिन उन्हें केवल 50 हजार रुपये ही मिले। पूरी रकम मिलने पर आरोपियों के फरार होने की योजना थी।
QR कोड पर बाकी रकम भेजने का संदेश बना पुलिस की सबसे बड़ी कड़ी
मामले में सबसे अहम खुलासा डिजिटल भुगतान को लेकर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य शूटर मोनू यादव को 50 हजार रुपये पेशगी दी गई थी। बाकी 9.50 लाख रुपये क्यूआर कोड के जरिए भेजे जाने थे।
हत्या के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर सुपारी देने वाले इंद्रजीत यादव को संदेश भेजा कि काम पूरा हो गया है और बाकी रकम क्यूआर कोड पर भेज दी जाए। इसी संदेश ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में मदद की।
पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपी कानपुर में ही रुके हुए थे। उनकी योजना थी कि बाकी 9.50 लाख रुपये मिलने के बाद सभी अलग-अलग दिशाओं में फरार हो जाएंगे, जिससे पुलिस को उन्हें पकड़ने में मुश्किल हो।
लेकिन क्यूआर कोड से जुड़े संदेश और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए पुलिस को आरोपियों की लोकेशन का पता चल गया। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर कार्रवाई की। तीन कथित सुपारी किलरों को पहले गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य शूटर मोनू यादव बाद में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पकड़ा गया।
32 बीघा जमीन के विवाद में रची गई थी हत्या की साजिश
कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के पीछे करीब 32 बीघा जमीन का विवाद सामने आया है। पुलिस जांच के अनुसार, जमीन के मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद और मुकदमेबाजी चल रही थी।
इसी रंजिश के चलते अधिवक्ता को रास्ते से हटाने की साजिश रचे जाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, मुख्य साजिश में इंद्रजीत यादव और मोनू यादव की भूमिका सामने आई है। मामले में मोबाइल फोन से बरामद व्हाट्सएप चैट और पैसों के लेन-देन की जानकारी भी जांच का हिस्सा बनी है।
अधिवक्ता को बहाने से कार में बैठाकर किया गया था अगवा
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, 31 अक्टूबर को अधिवक्ता गयादीन अहिरवार को फाइल पर चर्चा करने के बहाने बुलाया गया था। इसके बाद चाय-नाश्ते के बहाने उन्हें कार में बैठाकर अगवा कर लिया गया।
जब वह काफी देर तक घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। बाद में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की तलाश के दौरान कानपुर के गुजैनी क्षेत्र में नहर के पास उनका शव बरामद हुआ। घटना के बाद अधिवक्ता समाज में आक्रोश फैल गया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग उठी।
मुख्य आरोपी मोनू यादव भी गिरफ्तार
हत्याकांड में पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए मुख्य शूटर मोनू यादव को भी गिरफ्तार कर लिया है। 4 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग के पास पुलिस की घेराबंदी के दौरान मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में मोनू यादव के दोनों पैरों में गोली लगी, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
इस मामले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस आगे भी साजिश, आर्थिक लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
कालपी अधिवक्ता हत्याकांड में 10 लाख रुपये की सुपारी, केवल 50 हजार रुपये की पेशगी और बाकी रकम क्यूआर कोड से भेजने की योजना ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस के अनुसार, डिजिटल संदेशों ने आरोपियों तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई।
अब जांच का मुख्य पहलू यह है कि जमीन विवाद से जुड़ी साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और पूरे आर्थिक लेन-देन के पीछे कौन-कौन शामिल था। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।



