सोशल मीडिया पर ‘कच्चा बादाम’ गाने पर वायरल हुईं अंजलि अरोड़ा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका कोई डांस वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा विवाद है। 15 अक्टूबर को हुए ‘नगाड़ा नाइट्स’ कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। अंजलि अरोड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी, मानहानि, धमकी देने और गलत जानकारी देने के आरोप लगाते हुए कानपुर की एसीजेएम-5 अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है। अदालत ने शिकायतकर्ता के बयान दर्ज करने के लिए 5 नवंबर की तारीख तय की है।
### आखिर क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद कानपुर के लाजपत भवन लॉन में आयोजित ‘नगाड़ा नाइट्स’ कार्यक्रम से जुड़ा है। आयोजकों के मुताबिक, अंजलि अरोड़ा को इस कार्यक्रम में 45 मिनट की प्रस्तुति देनी थी। इसके लिए उनकी मैनेजर के साथ तीन लाख रुपये में समझौता हुआ था। आयोजकों का दावा है कि अंजलि ने मंच पर पहुंचने के बाद महज 12 मिनट तक प्रस्तुति दी और फिर कार्यक्रम बीच में छोड़कर चली गईं।
आयोजक आशीष कुमार का आरोप है कि इस घटनाक्रम के कारण कार्यक्रम के प्रायोजकों ने पूरी रकम का भुगतान नहीं किया, जिससे उन्हें करीब 20 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इन्हीं आरोपों को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, ये सभी शिकायतकर्ता के आरोप हैं, जिनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।
### क्या ‘कच्चा बादाम’ गाना बना विवाद की वजह?
कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी कि ‘कच्चा बादाम’ गाना बजने के कारण अंजलि नाराज हो गई थीं। हालांकि, अंजलि ने इस दावे को खारिज किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि उन्हें गाने से कोई परेशानी नहीं थी। उनके मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्थाओं, कथित दुर्व्यवहार और सुरक्षा इंतजामों में कमी के कारण वह असहज थीं।
अंजलि ने यह भी आरोप लगाया कि एयरपोर्ट से होटल तक और होटल में उनके साथ उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। दूसरी ओर, आयोजकों ने उनके आरोपों पर सवाल उठाए हैं। इस तरह दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
### 5 नवंबर पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में 5 नवंबर की तारीख अहम मानी जा रही है, जब अदालत में शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए जाने हैं। आयोजकों ने पहले अंजलि अरोड़ा को 1.20 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजने की बात भी कही थी। इसमें कथित आर्थिक नुकसान और सामाजिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठा को पहुंची क्षति के लिए मुआवजे की मांग की गई थी।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतकर्ता के बयान और आगे की कानूनी कार्यवाही इस विवाद को किस दिशा में ले जाती है।



